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शुक्रग्रह के खोये हुए सागर

  • aromaclasses18
  • May 8, 2024
  • 2 min read

पृथ्वी के पड़ोसी ग्रह

शुक्र ग्रह के खोए पानी के सागरों की गुत्थी सुलझाने की बड़ी कामयाबी वैज्ञानिको को मिली है। बोल्डर स्थित कोलोराडो विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने इस रहस्य का खुलासा किया है।

इस शोध से साफ हो गया है कि इस ग्रह पर पानी होने की शेष संभावना भी खत्म हो चुकी है। सर्वविदित है, शुक्र (वीनस) हमारे सौर मंडल का सबसे अधिक सुंदर ग्रह नजर आता है। जिसे पृथ्वी से नग्न आंखों से आसानी से देखा जा सकता है। स्याह रातों की खूबसूरती में चार चांद लगाने वाला यही ग्रह है। कभी इस ग्रह पर पृथ्वी की तरह विशाल समुद्र हुआ करते थे, जो गायब हो गए।



जिसकी तलाश

में वैज्ञानिक कई दशकों से पता लगाने में जुटे हुए थे, लेकिन इसका पता लगा पाना टेड़ी खीर बनी रही। मगर अब इस रहस्य का पर्दाफाश हो चुका है।


इसकी वजह शुक्र की रासायनिक प्रक्रिया है। जिसका पता कंप्यूटर सिमुलेशन के जरिए हो पाया है। दअरसल शुक्र ग्रह के वायुमंडल में हाइड्रोजन परमाणु विघटनकारी पुनर्संयोजन प्रक्रिया के माध्यम से

अंतरिक्ष में घूमते हैं। जिस कारण शुक्र हर दिन बड़ी मात्रा में अपना तरल जल खो देता है। 6 मई को नेचर जर्नल में शोध का निष्कर्ष - प्रकाशित हुआ है। शोधकर्ता वैज्ञानिक कहते हैं कि आकाशगंगा के कई ग्रहों के पानी व रासायनिक प्रक्रिया को समझना होगा।



शोधकर्ताओं ने शुक्र ग्रह को एक विशाल रसायन विज्ञान समझने के लिए कंप्यूटर

मॉडल का उपयोग किया, और ग्रह के घूमते हुए वातावरण में होने वाली विविध प्रतिक्रियाओं पर जूम किया। जिससे पता चला कि हाइड्रोजन, कार्बन और ऑक्सीजन के एक-एक परमाणु से बना अणु शुक्र ग्रह का पानी निगल गया और शुक्र के सतह का जल वाष्पित होकर आसमान में चला गया।



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