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धैर्य

  • aromaclasses18
  • Feb 21
  • 1 min read

धैर्य कोई शब्द नहीं, यह साधना का शंखनाद है,

तूफ़ानों के मध्य खड़ा, अडिग पर्वत-सा संवाद है।


जब समय के शर लगें और मन विचलित हो जाए,

धैर्य ही वह दीप है जो तम में भी मुस्काए।


यह अधीरता की अग्नि पर शीतल वर्षा बनता है,

विक्षोभों की भीड़ में भी मौन कमल-सा खिलता है।


जब पथ में कंटक हों, पग-पग पर अवरोध मिलें,

धैर्य ही चरणों को देता साहस, दृढ़ संकल्पों के तिलक मिलें।

यह पराजय के क्षण में आशा का विस्तार है,

हर असफलता के पीछे छिपा हुआ उद्गार है।


जो क्षण भर में टूटे नहीं, वही सच्चा वीर कहलाता,

धैर्य की धीमी आँच पर ही व्यक्तित्व निखरकर आता।


जल्दबाज़ी क्षणिक ज्वाला, शीघ्र ही बुझ जाती है,

धैर्य शाश्वत ज्योति बन, युगों तक राह दिखाती है।


जो प्रतीक्षा को पूजा माने, समय को मित्र बनाए,

वही जीवन-रण में अंततः विजय-ध्वजा लहराए।


धैर्य वह गूढ़ राग है, जो अंतर में गूँजता रहता,

मौन तपस्या की छाया में स्वर्णिम भविष्य सँवारा रहता।


अत: हे मन! अधीर न हो, क्षितिज स्वयं झुकेगा,

धैर्य की दृढ़ नौका पर ही तेरा स्वप्न फलेगा। 🌿

....... भुवन @mit




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