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पेपर लीक

aromaclasses18
Aug 11
1 min read

पेपर लीक

पर्चे लीक हुए तो बोले—“सब कुछ ठीक-ठाक है”,

युवा पूछे अपना हक़ तो शासन में सन्नाटा है।



रोज़गार के स्वप्न कुचले, लाठियों की मार चली,

सत्ता की चौखट पर फिर संवेदना क्यों हार चली?


कलम उठी तो डंडे बोले—“अब आवाज़ दबाओ”,

सवालों को मत सुनना, बस जयकारे लगाओ।


कुर्सी चाहे जितनी ऊँची, जनता सबसे भारी,

लाठी से इतिहास नहीं रुकता—जाग चुकी है जनता सारी।



Bhuwan Joshi @mitjoshi


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