
धुलते नहीं पाप
- aromaclasses18
- Feb 27, 2025
- 1 min read
*धुलते नहीं पाप

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कुंभ में डुबकी से
तभी धुलते पाप
जब तन के मैल संघ
मन के धुलते मैल
कपटी न पाले भ्रम
कुंभ डुबकी से खुलेगा
स्वर्ग का द्वार - मार्ग
जीवन का सार
सर्वश्रेष्ठ कर्म ही महान
धर्म मन की शांति का मार्ग
माया का त्याग - नाश
नाथ तभी होते मेहरबान
जब मानवता का कल्याण
जीवन का हो लक्ष्य प्रधान
छल - प्रपंच - ढोंग - दंभ
सिर्फ, और सिर्फ पाखंड
कुंभ डुबकी सरसता का भान
लोभ - मोह - माया का तर्पण
खुद ही खुद का मंथन - दर्पण
तन मैल संघ मन मैल का भक्षण।
प्रिय पाठकों यह कविता हमारी प्यारी छात्रा प्रियंका नारंग द्वारा लिखी गयी हैं , प्रियंका अभी 10वी की छात्रा हैं जिसे कविता पढ़ने व लिखने का बहुत शौक है।
, अरोमा क्लासेस के पूरे परिवार की और से प्रियंका को उज्वल भविष्य की शुभकामनाएं ।
आप यू ही आगे बढ़ते रहो ।
प्यारी स्कूल की घंटी https://aromaclasses18.wixsite.com/aroma-classeshb/post/प्यारी-स्कूल-की-घण्टी
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