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शिक्षा पर पहरा

  • aromaclasses18
  • Jan 28
  • 1 min read

शिक्षा पर पहरा




न्याय के नाम पर नियम रचे,

नियम नहीं—यह नज़र का फंदा,

कलम बँधी, ज़ुबान सिली,


ज्ञान हुआ सरकारी बंदा।

बराबरी की ओट में बैठी


चुपचाप एक चाल पुरानी,

कुछ प्रश्न बने अपराध यहाँ,


कुछ चुप्पी हुई राजधानी।

स्वर्ण की मेहनत दोष बनी,


सपना भी संदिग्ध कहलाया,

जिसने पूछा “क्यों” दो पल,


उस पर ही संदेह मढ़ाया।

अब आरोप ही प्रमाण हुआ,

और प्रमाण सफ़ाई माँगे,


न्याय तरसता दस्तावेज़ में,

जब सच फ़ाइलों में भागे।

गुरु भी आज सावधान हुए,


शब्दों का वजन तौला जाता,

कक्षा नहीं, अदालत बैठी,


जहाँ भविष्य रोज़ नापा जाता।

यह शिक्षा नहीं—नियंत्रण है,


यह सुधार नहीं—संहार है,

यह बिल नहीं—एक सोच है,


जो ज्ञान नहीं, डर संवार है।

आज उँगली इस क़ानून पर,


कल इतिहास करेगा वार,

पूछेगा—जब बुद्धि बंधी थी,


तब कौन था मौन का पहरेदार




....... भुवन @mit




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